नई समीक्षा में काशी के गौरव थे डॉ. बच्चन सिंह – डॉ. इंदीवर

बच्चन सिंह, व्यापक अध्ययन वाले साहित्य-इतिहास के विवेचक अनुसंधाता थे। वे आलोचना के नए उपकरणों से टकराते थे, उनकी उपयोगिता और औचित्य की छानबीन करते थे। बच्चन सिंह द्वारा की गई समीक्षा प्रतिष्ठित और स्वीकृत आलोचकों से अलग दिखती है। उनके लेखन में संतुलन के साथ-साथ समग्रता है। काशी में वे एकमात्र आलोचक थे जो नई समीक्षा में काशी के गौरव कहे जा सकते हैं। उनके अतिरिक्त छठे दशक में कोई आलोचक काशी से प्रारंभ कर काशी में ही अंतिम अवस्था को प्राप्त नहीं हुआ, उक्त विचार वरिष्ठ समीक्षक डॉ. इंदीवर ने साहित्यिक संघ एवं विद्याश्री-न्यास द्वारा राजकीय जिला पुस्तकालय में आयोजित काशी की धरोहर कार्यक्रम के पंद्रहवें आयोजन में व्यक्त किए। अध्यक्षता करते हुए प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि बच्चन सिंह में यथार्थोन्मुख जीवन-दृष्टि थी। उनकी मेधा समीक्षा, काव्यशास्त्र और इतिहास क्षेत्र में सृजित हुई है। उन्होंने भारतीय काव्यशास्त्र और पाश्चात्य काव्यशास्त्र का विवेकपूर्ण समन्वय उपस्थित किया है। उनकी आलोचना में भाषिक संरचना, उसके रूप तत्व की विलक्षणता का सूक्ष्म विवेचन हुआ है।
संगोष्ठी में कवि त्रिलोचन की काव्य यात्रा पर भी विचार करते हुए राजीव गांधी डीम्ड विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश के प्रवक्ता डॉ. हरिनिवास पांडेय ने त्रिलोचन को धरती का कवि कहा। उन्होंने उनकी अनेक कविताओं का उद्धरण प्रस्तुत कर उन्हें मुक्त छंद की कविता का उत्कृष्ट कवि बताया। उनकी प्रतिभा पर व्यापक प्रकाश डालते हुए उन्हें हिंदी सॉनेट का बेजोड़ कवि बताया।
कार्यक्रम के संयोजक विद्याश्री-न्यास के सचिव डॉ० दयानिधि मिश्र ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि जो समाज अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञ नहीं रहता वह उन्नति नहीं कर सकता, पीछे छूट जाता हैं। ‘सोच विचार’ पत्रिका के संपादक नरेंद्र नाथ मिश्र ने धन्यवाद-ज्ञापन किया। प्रो. सुरेंद्र प्रताप आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ आनन्द कृष्ण मासूम ने माता सरस्वती की वंदना से किया, तथा सुचिस्मिता पाण्डेय ने गीत प्रस्तुत किया। अत्रि भारद्वाज, डॉ० अशोक कुमार सिंह, गोपाल जी राय, अरून कुमार केशरी, मंजरी पाण्डेय, संतोष प्रीत, गिरीश पाण्डेय, प्रो. श्रद्धानंद, डॉ. प्रताप शंकर दुबे, कंचन सिंह परिहार, डॉ. कुमार महेन्द्र, डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. शिव कुमार पराग, डॉ. राजीव कुमार सिंह, रामजतन पाल, सूर्यकांत त्रिपाठी, प्रकाश उदय आदि उपस्थित थे। संचालन डॉ. संगीता श्रीवास्तव ने किया।