हिन्दी की धरोहर : काशी की सृजन-परम्परा (नवम् पुष्प) लक्ष्मी नारायण मिश्र एवं वासुदेव शरण अग्रवाल विषय पर चर्चा – 31 दिसम्बर 2025

लक्ष्मी नारायण मिश्र एवं वासुदेव शरण अग्रवाल दोनों भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा के अनुपम व्याख्याता थे

वाराणसी। पं विद्यानिवास मिश्र के जन्म शताब्दी समारोहों के अंतर्गत राजकीय पुस्तकालय अर्दली बाजार में साहित्यिक संघ एवं विद्याश्री न्यास के संयुक्त तत्त्वावधान में हिन्दी की धरोहर काशी की सृजन-परम्परा विषयक श्रृंखलाबद्ध व्याख्यान माला नवम पुष्प में आयोजित हुआ। शुभारंभ दीप प्रज्वलन और कंचन सिंह परिहार के मां सरस्वती की स्तुति से हुआ। कार्यक्रम की विषय वस्तु मे स्थापना एवं स्वागत करते हुए साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह ने कहा कि आज हिंदी के धरोहर कार्यक्रम में जिन दो वरिष्ठ साहित्यकारों पर चर्चा होगी वह दोनों भारत भारतीय परंपरा एवं संस्कृति के गहन अधिकता एवं सृजनकर्ता थे।

बीएचयू के शोधार्थी सर्वेश मिश्रा ने लक्ष्मी नारायण मिश्र के अवदान पर बोलते हुए कहा लक्ष्मी नारायण मिश्र हिंदी के ऐसे पहले आधुनिक नाटककार हैं जिन्होंने अपने नाटकों में परंपरा से बुद्द और कबीर की बौद्धिकता की आधुनिक समाज की समस्याओं के उद्घाटन में वसूली इस्तेमाल किया है। मिश्रा जी अपने नाटकों में परंपरा के व्याप्त रूढ़ियों को छोड़ने और आधुनिक मूल्यों को भारतीय दृष्टि से अपनाने के पक्षधर हैं। छायावाद के दौर में रहते हुए भी उन्होंने अपने नाटकों की भाषा सहज, सरल रखी। उनके नाटको में स्त्री जीवन से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं जिनमें परिवार, विवाह, प्रेम, विधवा विवाह और काम की समस्या विशेष रूप से में उल्लेखनीय है।

ऋषभ पाण्डेय ने कहा की वासुदेव शरण अग्रवाल भारतीय संस्कृति के अनुपम व्याख्याता थे। उन्होंने पणिति, पतंजलि वह विभिन्न भारतीय प्राचीन ग्रंथो का प्राणयन करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा एवं इतिहास का अध्ययन किया था वासुदेव शरण अग्रवाल के यहां जो वेस विचार मिलता है, वहां लोक और वेद दोनों का समन्वय दिखाई पड़ता है। वैदिक शब्दावली और जनपदीय संस्कृति का स्वरूप उनके यहां घुल-मिल मिल गए हैं।

अध्यक्षता करते हुए डॉ अति भारद्वाज ने कहा कि वासुदेव शरण अग्रवाल ने हिंदी गद्य को एक नई दिशा दी और भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने रखा। दूसरे प्रसिद्ध नाटककार लक्ष्मी नारायण मिश्र का हिंदी नाटककारों में अत्यंत महत्वपूर्ण नाम है।

डॉ संजय पंकज ने काव्यांजलि के अंतर्गत अपने लोकगीत सुना कर लोगों का को प्रभावित किया। कार्यक्रम का संचालन अंजली मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन सोच विचार पत्रिका के संपादक नरेंद्र नाथ मिश्रा ने किया। समारोह में डॉ (मेजर) अरविंद कुमार सिंह, ओम धीरज, हिमांशु उपाध्याय, प्रो प्रकाश उदय, आनंद मासूम, प्रभात मिश्रा, प्रो श्रद्धानंद, प्रभात झा गिरिजेश तिवारी, राजीव कुमार गोंड,डॉ मंजरी पांडेय सहित अन्य रचनाकार एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।