संस्कृति और संवेदना के कवि सच्चिदानंद वात्स्यायन अज्ञेय के जन्मदिन 7मार्च पर प्रतिवर्ष कुशीनगर में कलावती देवी न्यास एवं विद्या श्री न्यास के तत्वाधान में आयोजित तृतीय अज्ञेय स्मृति सम्मान जनचेतना के वरिष्ठ कवि श्री ज्ञानेन्द्रपति को प्रदान किया गया, कार्यक्रम में डॉ महेश्वर मिश्र, डॉ दयानिधि मिश्र, डॉ अनंत मिश्र , डॉ रामसुधार सिंह , न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ पारितोष मणि, न्यास के सचिव आशुतोष मणि के द्वारा श्री ज्ञानेन्द्रपति को शॉल, प्रतीक चिह्न, पुष्पगुच्छ और सम्मान राशि प्रदान किया गया, परितोष मणि ने स्वागत वक्तव्य देते हुए ज्ञानेन्द्रपति को संस्कृति और सामाजिक सरोकार के अगुवा कवि के रूप में उनकी भूमिका को रेंखकित किया, ज्ञानेन्द्रपति ने अपने स्वीकृति वक्तव्य में बड़ा कवि अपने समय और युग की सीमाओ का अतिक्रमण करता है, ऐसे रचनाकारों को समय कभी कभी सही आँक नहीं पाता, बाद में उनका मूल्यांकन करता है अज्ञेय ऐसे ही कवि थे जिन्होंने साहित्य की हर विधा में अपनी छाप छोड़ी, आज उनके नाम से प्राप्त सम्मान पाकर मैं अपने पूर्वज कवि और कलावती देवी न्यास के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ ,श्री अनंत मिश्र ने ज्ञानेन्द्र पति को अज्ञेय की परम्परा और विरासत का सजग कवि कहा, अध्यक्ष डॉ माहेश्वर मिश्र ने ज्ञानेन्द्रपति को संभावना और सरोकार के कवि के रूप में याद किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विद्या श्री न्यास के द्वारा अज्ञेय के निबंधों पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमे डॉ रामसुधार सिंह ने अज्ञेय के ललित निबंधों में कुट्टीचाटन जैसे बन्दर नचानेवाले मदारी के द्वारा अज्ञेय की सहजता और जन सरोकारों पर विस्तृत चर्चा की, डॉ अखिल मिश्र ने अज्ञेय के निबंधों में सामाजिक सरोकारों पर व्याख्यान दिया, डॉ परितोष मणि ने अज्ञेय की संस्कृति और भाषा विशेषकर हिंदी भाषा के अस्मिताबोध और स्वतंत्रता संघर्ष में हिंदी की भूमिका को लेकर उनके विपुल लेखन की चर्चा की ।डॉ प्रकाश उदय ने अज्ञेय की बहुलतावादी चिंतन को रेखांकित करते हुए आमंत्रित वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के तीसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसने नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया के अध्यक्ष जयनाथ मणि, इंद्रमणि दीक्षित, वरिष्ठ गीतकार श्री गिरधर करुण, श्री उद्भव मिश्रा और अन्य कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम के समापन सत्र में अज्ञेय स्मृति उपवन कुशीनगर में विद्या श्री न्यास के सचिव डॉ दयानिधि मिश्र के मार्गदर्शन और डॉ गौरव तिवारी के संयोजन में अज्ञेय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पण के पश्चात अज्ञेय की कविताओं का शोध छात्रो द्वारा वाचन किया गया। कलावती देवी न्यास के सचिव आशुतोष मणि ने आगंतुकों के प्रति आभार प्रदर्शन किया।
